KOMAL vs SUNIL
Party Details
- KOMAL
- SUNIL
Case Summary
KOMAL filed Case No. 1200447 in the District Court on 11 Aug 2023 against SUNIL. The case has undergone 7 hearings over 10 months. The case is currently pending. 1 order has been issued in this matter.
Hearing History (7)
- 20JUL 2024DisposedView Order ↗
Judge: Chief Judicial Magistrate
- 13MAY 2024AppearanceView Order ↗
Judge: Chief Judicial Magistrate
- 13MAR 2024AppearanceView Order ↗
Judge: Chief Judicial Magistrate
Orders (1)
- 20JUL 2024Copy of document.View Order ↗
Order No: 1
Judgement DetailsView full order PDF ↗
न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट,आजमगढ़। प्रार्थना पत्र संख्या -447/23 प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा-156(3) दंड प्रक्रिया संहिता कोमल चौहान बनाम सुनील यादव आदिथथ ाना मुबारकपुर , जिला आजमगढ़ दिनांक -.07.24 पत्रावली आदेशार्थ नियत है। प्रार्थी संत सेवक की तरफ से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 156(3) दंड प्रक्रिया संहिता पर प्रार्थी के विद्वान अधिवक्ता के तर्कों को विस्तारपूर्वक सुना। प्रार्थी की तरफ से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 156(3) दंड प्रक्रिया संहिता का संक्षिप्त कथथन इस प्रकार है कि प्रार्थी के गांव के हरिश्चन्द पुत्र बलई राम, कमलावती स्त्री हरिश्चन्द ग्राम कस्बा सराय थथ ाना मुबारकपुर जिला आजमगढ़ की रहने वाले हैं। घटना से करीब 6 दिन पूर्व उक्त हरिश्चन्द की बकरी मेरे सरसो के खेत में घुस कर खा रही थथी, मौके पर मेरी मां ने उनकी बकरी को मारकर बाहर भगा दिया। उसी रंजिश को लेकर दिनांक 03.12.23 के समय करीब 5.00 बजे उक्त हरिश्चन्द एवं कमलावती मेरी सेहन आबादी में लाठी डण्डे से लैस एक राय होकर मां बहन की गालियां देते हुए यह कहते हुए कि साली तुम्हारी हिम्मत मेरी बकरी को मारने की कैसे पड़ गई, आज तुम्हे जान से मार देंगे, कहते हुए मेरी मां सुराती देवी को लाठी डण्डे से मारने लगे उन्हे बचाने मैं व गांव की सावित्री स्त्री श्मामकृत तथथा अन्य बहुत से लोग आ गये घटना देखे व बीच बचाव किये। प्रार्थी द्वारा याचना की गयी है कि उक्त स्थि ति में थथानाध्यक्ष मुबारकपुर को यह आदेश देने की कृपा करें कि वह घटना की रिपोर्ट दर्ज कर आवश्यक कार्यवाही करें। थथ ाना मुबारकपुर की आख्यानुसार उक्त मामले में कोई अभियोग दर्ज नही है। प्रार्थी द्वारा प्रार्थना पत्र के समर्थन में स्वंय का शपथथ पत्र, एस.पी. आजमगढ को प्रेषित दरखास्त की प्रति, रजि० रसीद आदि दाखि ल किया गया है। प्रार्थी द्वारा प्रार्थना पत्र में किये गये तथ्यों से स्पष्ट है कि प्रार्थी को घटना के संदर्भ में समस्त तथ्य ज्ञात है। जिसके संदर्भ में वह स्वंय साक्ष्य देने में समर्थ है। न्यायालय द्वारा मामले को परिवाद के रूप में दर्ज कर मामले का निस्तारण किया जाना न्यायसंगत होगा। उपरोक्त तथ्य एवं परिस्थि तयों को दृष्टिगत रखते हुए एवं माननीय उच्च न्यायालय ,इलाहाबाद की विधि व्यवस्थथा 2007 ए०सी०सी पेज-754 सुखवासी बनाम स्टेट आफ यू०पी० आदि में ी० आदि में के परिपेक्ष्य में प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 156(3)दं०प्र०सं० परिवाद के रूप में दर्ज किये जाने योग्य है। आदेश प्रार्थी संत सेवक की तरफ से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 156(3) दं०प्र०सं० परिवाद के रूप में दर्ज हो। पत्रावली वास्ते साक्ष्य परिवादी अंतर्गत धारा 200 दं०प्र०सं० दिनांक 30.08.24 सम्बन्धि त श्रवण क्षेत्राधिकार न्यायालय में पेश हो। (सत्यवीर सिंह) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, आजमगढ़। जे०ओ०कोड-यू.पी.-2221