Saurabh Srivastava vs State of UP
Party Details
- Saurabh Srivastava
- State of UP
Case Summary
Saurabh Srivastava filed Case No. 2853 in the District Court on 3 Aug 2023 against State of UP. The case has undergone 4 hearings over 5 days. The case is currently pending. 1 order has been issued in this matter.
Hearing History (4)
- 8AUG 2023DisposedView Order ↗
Judge: Addl. District and Sessions Judge-XX
- 7AUG 2023HearingView Order ↗
Judge: Addl. District and Sessions Judge-XX
- 5AUG 2023HearingView Order ↗
Judge: Addl. District and Sessions Judge-XX
Orders (1)
- 8AUG 2023Copy of Bail OrderView Order ↗
Order No: 1
Judgement DetailsView full order PDF ↗
न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश , कोर्ट संख्या - 2 0 , कानपुर नगर। जमानत प्रार्थना पत्र संख्या - 2853/2023 CNR No-UPKN01 0067452023 1- सौरभ श्रीवास्तव उम्र लगभग 28 वर्ष पुत्र स्व० श्याम जी श्रीवास्तव निवासी-म०नं०-30 हिरन नगर उन्नाव जिला उन्नाव। ................प्रार्थी/अभियुक्त। बनाम 1- उत्तर प्रदेश राज्य सरकार द्वारा जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी), कानपुर नगर। ..............विपक्षी/अभियोगी। मुकदमा अपराध संख्या-124/2023 अंतर्गत धारा-379,411 भा.द.सं. थथाना-ग्वालटटोली, जिला-कानपुर नगर। दिनांक - 08.08.2023 प्रार्थी/अभियुक्त सौरभ श्रीवास्तव की ओर से उपरोक्त मुकदमे में जमानत प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया गया है। जमानत प्रार्थनापत्र के साथथ अभियुक्त की माँ माला श्रीवास्तव का शपथथपत्र संलग्न किया गया है। प्रार्थी/अभियुक्त की ओर से जमानत प्रार्थनापत्र मय शपथथपत्र प्रस्तुत करते हुए कथथन किया गया है कि वादी मुकदमा के द्वारा मुकदमा पंजीकृत करवाया थथा जो की कथित घटटना के कई दिनो के बाद पंजीकृत करवाया गया है। प्रार्थिनी का पुत्र एक सीधा शादा मेहनत करके अपना व अपने परिवार का पेटट पालने वाले व्यक्ति है। उसका न तो क्षेत्र मे किसी से कोई विवाद है न ही आज तक झगड़ा ही हुआ है। थथाना ग्वालटटोली की पुलिस व वादी मुकदमा के द्वारा उक्त मुकदमे मे फंसाया गया है। उसका उक्त क्रिया कलाप से किसी प्रकार का कोई भी लेना देना नही है। प्रार्थिनी के पुत्र को झूठी गिरफ्तारी दिखा कर गलत व गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है व कई दिन कोहना थथाने में रखने के बाद जेल भेजा गया। जिसमे बाद मे बरामदगी के उक्त मुकदमे में जोड़ा गया है। प्रार्थी का पुत्र ही एक मात्र परिवार का सहारा है। वह प्राइवेटट नौकरी करता है। उसके द्वारा किसी प्रकार का कोई कार्य नही किया गया है। उक्त मुकदमे से पूर्व प्रार्थिनी के पुत्र का कोई भी आपराधिक इतिहास नहीं है। प्रार्थिनी के पुत्र का यह प्रथथम जमानत प्रार्थना पत्र है इसके अतिरिक्त प्रार्थी के पुत्र का अन्य कही जमानत प्रार्थना पत्र न तो प्रस्तुत किया गया है न ही लम्बि त है न ही विचाराधिन है। प्रार्थिनी के पुत्र को यदि जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह जमानत का दुरूपयोग नहीं करेगा और न ही गवाहन पर बेजा असर डालेगा तथथा प्रत्येक नियत तिथि पर माननीय न्यायालय उपस्थि त आता रहेगा। उपरोक्त परिस् ोक्त परिस्थि तियों में प्रार्थिनी के पुत्र को दौरान मुकदमा विचारण जमानत/मुचालके पर रिहा किया जाना न्यायहित में न्यायसंगत होगा। प्रार्थी/अभियुक्त का एक जमानत प्रार्थनापत्र महानगर मजिस्टट्रेटट सप्तम कानपुर नगर से दिनांक 25.07.2022 को निरस्त किया जा चुका है। प्रार्थी/अभियुक्त का यह प्रथथम जमानत प्रार्थनापत्र है इस जमानत प्रार्थनापत्र के अतिरिक्त कोई अन्य जमानत प्रार्थनापत्र माननीय न्यायालय द्वारा न तो निरस्त किया गया है और न ही किसी न्यायालय में विचाराधीन है। प्रार्थी/अभियुक्त की जमानत माननीय न्यायालय द्वारा स्वीकार की जाती है तो प्रार्थी माननीय न्यायालय को पूर्ण रूप से आश्वस्त करता है कि प्रार्थी/अभियुक्त माननीय न्यायालय के आदेशों का विधिवत अक्षरश: पालन करेगा। प्रार्थी/अभियुक्त माननीय न्यायालय के समक्ष वास्ते विचारण समय में उपस्थि त रहेगा। प्रार्थी/अभियुक्त साक्षियों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित नहीं करेगा। अतः प्रार्थी/अभियुक्त को जमानत पर रिहा किये जाने की याचना की गयी है। विद्वान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) के द्वारा जमानत प्रार्थनापत्र का विरोध करते हुए यह तर्क दिया गया है कि अभियुक्त पर वादी मुकदमा की मोटटर साईकिल को चोरी करने तथथा उक्त मोटटर साईकिल को अभियुक्त के पास से बरामद होने का आरोप है। प्रार्थी/अभियुक्त जमानत पाने पर जमानत शर्तों का उल्लंघन करेगा तथथा पुनः अपराध कारित करेगा। तदनुसार जमानत आवेदन पत्र को निरस्त किये जाने की प्रार्थना की गयी है। प्रार्थी/अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता तथथा विद्वान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) के तर्कों को सुना तथथा संपूर्ण केस डायरी सहित पत्रावली का अवलोकन किया। उभयपक्ष के विद्वान अधिवक्ताओं के तर्को एवं केस डायरी व पत्रावली के अवलोकन से विदित होता है कि वादी मुकदमा आशीषष प्रजापति की तहरीर के आधार पर संबंधित थथाने पर एक अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध धारा 379 भा.दं.सं. के अंतर्गत प्रथथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर, विवेचना की कार्यवाही प्रचलित की गयी। दौरान विवेचना अभियुक्त को गिरफ्तार कर उसके पास से इस मुकदमें से संबंधित चोरी मोटटर साईकिल बरामद होने का आरोप है। पत्रावली के अवलोकन से दर्शित होता है कि प्रथथम सूचना रिपोर्ट में अभियुक्त नामजद नहीं है। अभियुक्त का नाम विवेचना के दौरान प्रकाश में आया है। फर्द बरामद फर्द बरामदगी का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है एवं प्रकरण में आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किा जा चुका है। अभियुक्त दिनांक 14.07.2023 से जिला कारागार में निरुद्ध है। अभियुक्त द्वारा कारित अपराध मजिस्टट्रेटट न्यायालय द्वारा विचारणीय है। अतः उभयपक्ष द्वारा प्रस्तुत तर्कों, अपराध की प्रकृति तथथा अभियुक्त द्वारा कारागार में व्यतीत की गयी अवधि को दृष्टिगत रखते हुये, प्रकरण के समस्त तथ्य एवं परिस्थि तियों के परिप्रेक्ष्य में जमानत का आधार पर्याप्त हैं। तदनुसार प्रकरण के गुण-दोषष पर टिप्पणी किये बिना, न्यायालय के मत में प्रार्थी/अभियुक्त द्वारा प्रस्तुत जमानत आवेदन पत्र स्वीकार किये जाने योग्य है। आदेश प्रार्थी/अभियुक्त सौरभ श्रीवास्तव को मुकदमा अपराध संख्या-124/2023, अंतर्गत धारा- 379,411 भा.द.सं., थथ ाना-ग्वालटटोली, जिला-कानपुर नगर के प्रकरण में मु०50,000/-(पचास हजार रूपये) का व्यक्तिगत बंधपत्र एवं इतनी ही राशि के दो प्रतिभू संबधित न्यायालय की संतुष्टि पर दाखि ल करने पर इस शर्त के साथथ जमानत पर रिहा किया जाता है कि वह गवाहों को डरायेगा व धमकायेगा नहीं, विचारण में सहयोग करेगा, जमानत का दुरूपयोग नहीं करेगा तथथा प्रत्येक तिथियों पर न्यायालय के समक्ष उपस्थि त होकर कार्यवाही में सहयोग करेगा। आदेश की एक प्रति रिमाण्ड प्रपत्र अथथवा मूल प्रति के साथथ संलग्न किये जाने हेतु सम्बन्धि त न्यायालय को प्रेषित हो। आदेश की एक प्रति जेल अधीक्षक जिला कारागार कानपुर नगर को जरिये ई-मेल इस निर्देश के साथथ प्रेषित की जाये की आदेश का इन्द्राज e-prison software में करे और यदि सात दिन के अन्दर अभियुक्त रिहा नहीं होता है तो उसकी सूचना अविलम्ब सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रदान करे। इसके अतिरिक्त यदि अभियुक्त आदेश पारित होने के एक माह तक रिहा नहीं होता है तो इसकी सूचना सम्बन्धि त न्यायालय, जिसके द्वारा आदेश पारित किया गया है, को अविलम्ब प्रेषित करे। (नीलांजना) अपर सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या 20, कानपुर नगर। Digitally signed by NEELANJANA Date: 2023.08.08 16:50:51 IST Reason: Document Owner Location: District and Sessions Court % DSUnknown q 1 G 1 g 0.1 0 0 0.
0.1 0 0 0.1 9 0 cm 0 J 0 j 4 M []0 d 1 i 0 g 313 292 m 313 404 325 453 432 529 c 478 561 504 597 504 645 c 504 736 440 760 391 760 c 286 760 271 681 265 626 c 265 625 l 100 625 l 100 828 253 898 381 898 c 451 898 679 878 679 650 c 679 555 628 499 538 435 c 488 399 467 376 467 292 c 313 292 l h 308 214 170 -164 re f 0.44 G 1.2 w 1 1 0.4 rg 287 318 m 287 430 299 479 406 555 c 451 587 478 623 478 671 c 478 762 414 786 365 786 c 260 786 245 707 239 652 c 239 651 l 74 651 l 74 854 227 924 355 924 c 425 924 653 904 653 676 c 653 581 602 525 512 461 c 462 425 441 402 441 318 c 287 318 l h 282 240 170 -164 re B Q